Our Seva
Atmyog Sansthan (रजि.)
सेवा प्रकल्प
वैदिक यज्ञों पर अनुसंधान
Activeवेदों में निहित ऋषियों की सबसे बड़ी खोज यज्ञ व योग है। जीवन को जब अनिष्ट घेर लेते हैं। तो दुनियां की सुखदाई चीजें दुःखदाई होने लगती हैं। जीवन से संबंधित हर महत्वपूर्ण सम्बन्ध माता-पिता, भाई-बहन, मित्र, पुत्र-पत्नी, समस्त कर्म, समस्त वस्तुऐं प्रतिकूल होने लगती हैं। जो आप करना चाहते हैं कर सकते हैं किन्तु नहीं कर पाते, जो नहीं करना चाहते वह हो जाता है इन सबका कारण अनिष्ट है। इन सब अनिष्टों का निवारण व उपाय यज्ञ व योगमय जीवन है। यज्ञों में समस्या के आधार पर ऋतु अनुकूल, सामग्री व मंत्रों का आविष्कार करना। रोग, शोक, सन्ताप, कलह-क्लेश, अभाव, अशान्ति आदि के निवारणार्थ शोध कार्य करना। ऋषियों की सर्वाधिक महत्वपूर्ण पद्धति पर पूर्ण अनुसंधान कर यज्ञ के विस्तृत, विराट एवं यथार्थ स्वरूप को सम्मुख रखना।
देवाश्रम
Upcomingदेवाश्रम में शोध किया जायेगा कि वृद्धों को उचित सम्मान और सेवा से संतुष्ट करके इनके द्वारा प्राप्त आशीर्वाद से हर इंसान अपनी मनोकामना पूर्ण कर सकता है। इसमें जो वृद्ध अपनी गृहस्थ धर्म को पूराकर लोक कल्याण के लिए वानप्रस्थ के रूप में अपना जीवन समर्पित कर अपने जीवन के तृतीय चरण में जीवन को सेवा, समर्पण, स्वाध्याय, सत्संग व साधना के द्वारा स्वस्थ व सुन्दर बनाना चाहते हैं। उन्हें स्वस्थ रखने के लिए उनकी योग्यता के अनुसार एक निश्चित दिनचर्या में विभिन्न सेवा योजनाऐं इस प्रकल्प में होंगी।
एक वृद्ध जो बीमारी से दुःखी है, अपने परिवार से दुःखी है एवं पड़ोसी से दुःखी है। रिश्तेदारों से दुःखी है। यह देव होते हुए भी किसी का दुःख दूर नहीं कर सकता किन्तु इसी वृद्ध की परिवार सेवा और सम्मान करें तो सेवा सम्मान के सुख से इसकी बीमारी ठीक हो जायेगी, पड़ोसी सम्मान करेंगे। अब यही वृद्ध इतना सुखी हो गया कि अपने आशीर्वाद से सबको सुखी कर सकता है। किसी का भी कल्याण कर सकता है।
ऋषिकुल
Upcomingजिसमें देश के शिरोमणि प्रशासनिक पदों से सेवानिवृत्त हुए विविध विद्या विशेषज्ञ भारत राष्ट्र के अर्थावतार, उदार विचार उद्योगपति घरानों के व्यक्ति जो अपनी व्यस्त जिन्दगी से पृथक् होकर जीवन के महत्वपूर्ण अन्तिम चरण में योग एवं तपस्या के सुखद मार्ग पर चलकर स्वस्थ, मस्त, जबरदस्त रहते हुए अपना परलोक सुधारना चाहते हैं। इस आश्रम में उनको पूर्ण सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी। उनका खान-पान रहन-सहन व दिनचर्या ऋषियों की भांति रहेगी। 4 बजे ब्रह्म मुहूर्त में उठने से लेकर 9 बजे सोने तक की समस्त दिनचर्या आश्रम में नियमित, संयमित मर्यादित व व्यवस्थित होगी, जिसमें यज्ञ, योग, तप, भक्ति, मौन, मनन, चिंतन, स्वाध्याय व प्रवचन एवं तर्क-वितर्क कर ये अपने जीवन को परिमार्जित करेंगे, और फिर परिवार, समाज व राष्ट्र पर आने वाली प्रत्येक आपत्ति-विपत्ति में ये तपस्वी, ऋषि, मुनिजन अपने विवेक पूर्ण अनुभव एवं चिन्तन से परिवार, समाज व राष्ट्र के उन्नायकों का मार्ग दर्शन करेंगे। इन तपस्वी, सन्तजनों के दर्शनों का समय प्रतिदिन 1 घंटा निर्धारित होगा। ये परम तपस्वी साधकजन रोग, शोक, सन्ताप, कलह, क्लेश, अभाव, अशान्ति एवं प्राकृतिक आपदाओं-विपदाओं के कारण-निवारण पर शोध कार्य करेंगे। इस सूझ-बूझ पूर्ण अनुसंधान से परिवार, समाज व राष्ट्र का कल्याण होगा।
नन्दनी गौधाम
Active📍 ग्राम अलमपुर के सामने, मध्य गंगा नहर पर बैराज और रामराज के बीच
ऋषियों ने गऊ माता, ब्राह्मण, वेदमाता, (भूमि) धरती माता को भगवान् के समान दर्जा दिया है। गौ सेवा व गौदान से अनिष्ट मिटते हैं। रोग, शोक, सन्ताप, कलह, क्लेश समस्त अशुभ मिटते हैं।
गौ का दूध अमृत होता है, अमृत का मूल्यांकन करना असम्भव है। गौ का गोबर, गौमूत्र का मूल्यांकन करें तो कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी में हीरकभस्म आयुर्वेद की सर्वाधिक उपयोगी औषधि है। जिसकी कीमत बाजार में 16 से 20 हजार रूपये प्रति ग्राम है। गौमूत्र इससे भी अधिक उपयोगी है, किन्तु गौ के दूध, मूत्र गोबर आदि समस्त पदार्थों से भी अधिक मूल्यवान, महत्वपूर्ण व उपयोगी गऊ की सेवा है। जिस गौ के गोबर व मूत्र से किसी के प्राणों की रक्षा हो, जिस गौ के घी व दूध से देवयज्ञ, अतिथि यज्ञ सम्पादित होता हो, उस गौ की सेवा का निमित्त बन हम अपना जीवन धन्य करें। अपने इस सेवा प्रकल्प में भारतीय नस्ल दुधारू बनाना, भारतीय किसानों के लिए गौ की उपयोगिता सिद्ध करना है हमारा विश्वास है कि पूर्ण सेवा से तृप्त हुई गौ किसी की भी कामना को पूर्ण कर सकती है। दुखी या असहाय गौ को नन्दनी या कामधेनु नहीं कहा जा सकता। गौ माता देव है और देवों को उचित सम्मान मिलने से ही वे हमारे अनिष्ट मिटा सकेंगे। साधारण गौओं को असाधारण बनाने के लिए नये अनुसंधान होंगे। गौओं के खान-पान, रहन-सहन की उत्तम व्यवस्था, रूग्ण गौवों को सम्पूर्ण उपचार की समुचित व्यवस्था की जायेगी।
देश की सभी नस्लों की गायों को दुधारू व अधिक उपयोगी बनाया जायेगा। महर्षि दयानन्द सरस्वती ने गौ करूणा निधि नामक 'लघु ग्रन्थ' में गौ का महत्व प्रस्तुत किया है। गौ माँ देश का धर्म ही नहीं धन भी है। इस 'नन्दनी गौधाम' में गौ के घी, दूध, मूत्र, गोबर से H.I.V. एवं कैंसर जैसे खतरनाक बीमारियों का निदान करने के लिए रचनात्मक अनुसंधान किया जायेगा। देश-देशान्तर के समस्तजनों को गौ धन की ओर आकर्षित मन वाला किया जायेगा।
आयुर्वेद
Activeजीवन रक्षिणी विधा। ऋषियों की परम्परा के अनुसार आयुर्वेद का संरक्षण एवं संवर्धन करना, आयुर्वेद को हम इतना समझ पाये हैं कि भारतीय ऋषियों की इस पुनीत आदर्श चिकित्सा परम्परा को उसी पवित्र निष्ठा से निभाया जाता और जनसाधारण उसी पवित्रता से आयुर्वेद के प्रति विश्वास और सम्मान बनाये रखते तो दुनियां में आज किसी भी पैथी का अविष्कार ही न होता। क्योंकि आयुर्वेद जीवन की एक पूर्ण सफल व सुरक्षित आदर्श चिकित्सा पद्धति है। आयुर्वेद न केवल रोग, अपितु रोग, शोक, सन्ताप, भय व्याधियाँ कलह क्लेश, भ्रम, भ्रान्ति, अज्ञान, अंधकार, अभाव, अशान्ति आदि समस्त, विघ्न बाधाओं एवं अशुभ वृत्तियों का पूर्ण, सफल व समर्थ समाधान है। हरी जड़ी बूटियों के स्वरस एवं रस रसायन से एच.आई.वी., कैंसर, माइग्रेन, शुगर जैसे असाध्य रोगों पर अनुसंधान कर पूर्ण समाधान किया जायेगा।
महर्षि पतञ्जलि प्रणीत अष्टांग योग
Activeमहर्षि पतञ्जलि द्वारा प्रणीत अष्टांग योग का प्रचार-प्रसार। योग के द्वारा मानवीय मूल्यों का संवर्धन। योग प्राणायाम ध्यान द्वारा शारीरिक मानसिक, बौद्धिक व अध्यात्मिक विकास। संतुलित, नियमित, संयमित, व्यवस्थित अनुशासित, मर्यादित आदर्श जीवन का प्रचार-प्रसार करना। योग, जीवन चतुष्टय (धर्म, अर्थ, काम मोक्ष) की सिद्धि का पूर्ण समर्थ समाधान है इसे वैज्ञानिक तरीके से अनुसंधान कर सिद्ध करना।
प्राकृतिक चिकित्सा
Upcomingप्राकृतिक चिकित्सा द्वारा समस्त रोगों का उपचार। समाज को प्राकृतिक ढंग से जीने के लिए प्रेरित करना, हमारा खान-पान, रहन-सहन, सोना-जागना, प्रकृति, नियमानुसार होने से जीवन रोग-शोक मुक्त होगा। हमारे जीवन की हर समस्या 'कहीं न कहीं' प्रकृति से जुड़ी है। उसका प्रमुख कारण आज इंसान बनावटी जीवन जी रहा है या तो व्यक्ति किसी को देखने के लिए या किसी को दिखाने के लिए अपना जीवन जी रहा है।
गुरुकुल-आदर्श शिक्षाप्रणाली
Upcomingविविध भाषा, वेद-वेदांग-योग, दर्शन उपनिषद आदि की आदर्श गुरुकुलीय पद्धति में आधुनिक शिक्षा। आदर्श समाज की स्थापना के लिए कुमार युवा अवस्था ही आदर्श शिक्षा, आदर्श संस्कार, आदर्श मर्यादाओं की परम्पराओं को जीवित रखने का एक मात्र साधन है। जिस राष्ट्र का पूरा ध्यान, अपनी बाल एवं युवा पीढ़ी की सुव्यवस्थित शिक्षा पर होगा, वह राष्ट्र हमेशा विश्व गुरु रहेगा आप लोगों के सहयोग से हमारा यह प्रयास एक नयी क्रांति सिद्ध होगा। पूर्व की भांति गुरुकुल हमारे समाज के सुखद-समृद्ध नव निर्माण का केन्द्र होगा।
विशिष्ट प्रतिभा सम्पन्न समृद्ध छात्रों को सम्मानित एवं विशिष्ट प्रतिभा सम्पन्न निर्धन छात्रों को सम्मान एवं सहयोग प्रदान करना।
